Friday, November 26, 2010
बच्चों से जुड़ें
बच्चे आखिर बच्चे ही हैं। कई बार हम बड़े भी बच्चे बन कर देखें तो सही। आज की इस भाग दौर की जिंदगी में शायद बच्चों जैसा जीना हमें कुछ शुकून दे जाये। बच्चों के साथ खेलना, बच्चों से बाते करना, बच्चों की छोटी सी समस्या को सुलझाने का प्रयास करना। हमारी बहुत साडी तकलीफों को कम कर सकता है। बच्चों के साथ जुड़ कर बच सकते हैं मानसिक विमारियों से। हम बच सकते हैं हृदयाघात से।लेकिन बच्चों से जुड़ना है बच्चे बन कर ही। दिन भर की भाग दौर के बाद शायद सोने के पहले बच्चो से खुल कर बात करने से उनकी समस्याएं सुनकर हम कोशिश करे अपनी समस्याएं भूलें.
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